उपकर्म / Upkarma

“उपकर्म” चिकित्सा का एक अंग


पंचकर्म के अतिरिक्त आयुर्वेद में कई ऐसे कर्म हैं जो रोगी व स्वस्थ्य व्यक्तियों के संपूर्ण स्वास्थ्य की दृष्टि से लाभदायक हैं। इन विशिष्ट कर्मों को “उपकर्म” का नाम दिया गया है। यथा-हृदय वस्ति, कटि वस्ति, जानु स्ति, शिरोधार, उद्धर्तन, मुखालेप, अग्निकर्म, नेत्रधावन, व नेत्रतर्पण, योनि धावन व तर्पण, बन्धन, धूमपान, परिषेक उपनाह आदि। इनका प्रयोग व्याधि विशेष व्यक्ति की प्रकृति, शारीरिक स्थिति के अनुरूप किया जाता हैं। पंचकर्म की अपेक्षा यह सरल एवं कम समय लेत हुए भी रोगी को अच्छा लाभ पहुँचाते हैं।